रचना चोरों की शामत

Sunday, 17 July 2016

सिजु नओं देखारि मूँखे

चित्र से काव्य तक
माउ मिठिड़ी, सिजु नओं देखारि मूँखे।
इएँ न पहिंजे गर्भ में ई मारि मूँखे। 

करि न तूँ अपमानु पहिंजो, पाण जननी
ई जनमु जी-जान साँ सींगारि मूँखे।

दुखु न कर तूँ, तुहिंजो लु थींदसि अमड़ि माँ
जी न सघंदीअ, मोकिले हुन पारि मूँखे।

हकु न मूँखाँ फुरि, भुलाए फ़र्जु पहिंजो
दींह पूरा धारिणी! तूँ धारि मूँखे। 

ढोंगी-नर चाहिनि अगर मुहिंजो विसर्जन
ढाल थी तिनि जी न जीजलि, गारि मूँखे।

माँ त आहयाँ वलि अमड़ि, तुहिंजे अङण जी
चोट ते चढ़ंदी वञा, इएँ सारि मूँखे।

गु रुसे परवा न कर, खुद शक्ति आँ तूँ
कल्पना जे अगियाँ स्वीकारि मूँखे। 

-कल्पना रामानी 

1 comment:

कल्पना रामानी said...

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25 Comments

Akshay Rochwani बहुत अच्छी है
विजय कुमार- राय बहुत सुन्दर
Shikha Singh -सुन्दर
Mansi Khatri- Bahut badhiya...
गुड्डो दादी-कल्पना जी
धाधो सुठ्ठौ गीत लिखखिं यां
बधाएे
Ashok Kungwani-सुहिंडो़
प्यार भर्यो गीत ।
तव्हांजो शुकरानो लख्ख-लख्ख वाधायूँ ।
गुप्ता कुमार सुशील-वाह्ह बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति
Prerna Gupta-सुन्दर संदेश
Dayaram Methani-वाह ! अति सुंदर ।
Hiro Wadhwani-wah lajawab
Hari Sharma-बहुत सुन्दर वाह्ह
Bhawana Sinha-बहुत सुंदर
Seema Harisharma-बहुत सुंदर
Shailendra Sharma-सुंदर अभिव्यक्ति
Mithilesh Saxena-Bahut sundar
Amit Malviya Harsh-वाह्ह्ह बहुत सुंदर
अन्नपूर्णा बाजपेई 'अंजु'-बहुत खूब वाह दीदी
कल्पना मनोरमा-कल्पना दी, आप कमाल लिखती हो,बधाई
रश्मि सिंह-बहुत भाव पूर्ण रचना
Murlidhar Hasani-आनंद अची वियो दाढो सुहिणो गीत
Kanyo Shewani-बहुत सुंदर
कल्पना रामानी- रचना पर अपना स्नेह बरसाने के लिए सभी मित्रों की मन से आभारी हूँ
Rupali Sharma-Bohot sunda panktiya
Manoj Kumar Moon वाह वाह
UshaLaxmi Sharma · Friends with Murlidhar Hasani
बेटी?
दीपशिखा है अंधकार की
घनी घटा की उजियारी।
उषा है यह कमलवृन्द की
है पतझड की हरियाली।

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